अमीटर को सर्किट में सीरीज (श्रेणी क्रम) में जोड़ा जाता है क्योंकि यह विद्युत् धारा को मापता है, और धारा को सही तरीके से मापने के लिए उसे पूरी धारा के रास्ते में होना चाहिए।
जब अमीटर सीरीज में लगाया जाता है, तो सर्किट की पूरी धारा अमीटर से होकर गुजरती है। इससे सटीक माप संभव होता है। अमीटर का आंतरिक प्रतिरोध (resistance) बहुत कम होता है ताकि वह सर्किट में ज्यादा नुकसान न करे और सर्किट के माध्यम से सामान्य धारा प्रवाहित हो सके।
अगर अमीटर को समांतर (parallel) में जोड़ते, तो दो समस्याएं होतीं: पहला, समांतर जुड़े उपकरण पर सर्किट का पूरा वोल्टेज आता है, जिससे अमीटर को नुकसान हो सकता है क्योंकि उसके पास बहुत कम प्रतिरोध है। दूसरा, यह केवल उस शाखा की धारा को मापता, पूरी सर्किट की नहीं।
सीरीज कनेक्शन से अमीटर पूरी धारा को सटीकता से माप सकता है और सर्किट के संचालन में न्यूनतम हस्तक्षेप करता है।